पेट और आंतों को मजबूत कैसे बनाएं?HealthPlanet

Posted on Wed 14th Dec 2022 : 16:52

आंतों की कमजोरी का इलाज - Intestinal Weakness in Hindi

आंत हमारे शरीर का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. हम जो भी खाते हैं वो पचने के बाद हमारे आंतों से होकर ही गुजरता है. हमारे पचे हुए भोजन का अंतिम हिस्सा आंत में अवशिष्ट पदार्थ के रूप में तब तक जमा रहता हैं जब तक उसे मल के रूप में शरीर से निकाल नहीं दिया जाता. यही कारण है कि आंतों का स्‍वस्‍थ होना बेहद आवश्यक है. अब तक आप ये समझ ही चुके होंगे कि हमारे शरीर में आंत आहार नली का ही एक भाग है जो कि पेट से गुदा तक फैली होती है. इसलिए इसके अस्‍वस्‍थ होने का सीधा असर हमारे स्‍वास्‍थ्‍य पर पड़ता है.
रोजाना व्यायाम
जो व्यक्ति अपने दिनचर्या में सुस्ती भरा जीवन व्यतीत करता है उसके आंत के खराब होने की संभावना अधिक रहती है. लेकिन यदि आप नियमित रूप से योग व व्यायाम करेंगे तो आपके पाचनतंत्र की समस्या आपसे मीलों दूर रहती है. कुछ समय के लिए शाम और सुबह टहलना बेहद फायदेमंद होता है. आंतों को दुरुस्‍त रखने के लिए कम से कम 20 मिनट हर दिन किसी जोरदार तरीके को चुनकर व्यायाम करें.
फाइबर युक्त खाद्यपदार्थ
वसायुक्त और संसाधित खाद्य पदार्थो से दूर रहें, ये कब्ज और अन्य पाचन समस्याओं को जन्‍म देती हैं. इसलिए आपको चाहिए कि आप अपने आहार में ज्यादा से ज्यादा फाइबर की मौजूदगी वाले खाद्य पदार्थों को सम्मिलित करें. इसके लिए कई सब्जियां या फल के साथ-साथ कई प्रकार के अनाज और खजूर इत्यादि भी काफी मददगार साबित होते हैं. दरअसल ये हामरे आंतों के सुचारु रूप से काम करने में मददगार होते हैं. लेकिन वहीं दूसरी तरफ फिटनेस बार और जूस ड्रिंक्‍स की तरह अपेक्षाकृत स्वस्थ नाश्ते आंतों के कार्य में बाधा उत्‍पन्‍न करते हैं.
पानी की पर्याप्त मात्रा
अगर आप फाइबर की अधिक मात्रा में लेते हैं, और इसके साथ पर्याप्‍त पानी नहीं पीते हैं तो आपकी आंतों को नुकसान हो सकता है. इसलिए इन स्‍वस्‍थ अनाज और सब्जियों के साथ पानी की उचित मात्रा लेना कभी नहीं भूलना चाहिए.
विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालना
डिटॉक्सिफिकेशन शरीर को सेहतमंद और तरोताजा रखने की एक प्रक्रिया है. इस प्रक्रिया के जरिए शरीर के टॉक्सिंस को बाहर निकाला जाता है, ताकि आपको शरीर के तमाम विकारों से मुक्ति मिल सके. डिटॉक्‍स के लिए कैफीन युक्त ड्रिंक की बजाय बिना छना ताजे फलों का जूस लें. यह न सिर्फ बॉडी में विटामिन की कमी दूर करेगा, बल्कि फाइबर की जरूरत भी पूरी करेगा. इससे पेट साफ रखने में काफी मदद मिलती है. इसके अलावा, हर्बल टी भी डिटॉक्सिफाई करने का काम करती है. आप चाहें, तो ग्रीन टी और नींबू पानी भी ले सकते हैं.
प्रोबायोटिक्स
नवीनतम वैज्ञानिक अनुसंधान के अनुसार, आंत्र रोग और अल्सरेटिव कोलाइटिस जैसी बीमारियों को दूर करने में प्रोबायोटिक्स बहुत मददगार होता है. हमारी आंत असंख्य बैक्टेरिया से भरी होती है. इनमें से कुछ हमारे शरीर के लिए रोग का कारण भी हो सकते हैं और जो अच्छे होते हैं, वे भोजन को पचाने का काम करते हैं तथा पाचन तंत्र को संतुलित रखने का काम करते हैं. प्रोबायोटिक भोज्य पदार्थों के सेवन से आंतों की कार्यप्रणाली को सशक्त बनाया जा सकता है, इन्फेक्शन से बचाव किया जा सकता है. प्रोबायोटिक मुख्यत: डेयरी प्रोडक्ट में ही होता है, जैसे दूध व दही.
आराम करें
शायद यह सबसे महत्‍वपूर्ण है. आपकी आंत सचमुच एक दूसरा मस्तिष्क होता है - शरीर में मौजूद लगभग 95 प्रतिशत सेरोटोनिन आपके आंत्र पथ को अपनी एक अलग मस्तिष्क संबंधी प्रणाली में रखता है. इसलिए आंतों के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए मस्तिष्‍क का स्‍वास्‍थ्‍य होना जरूरी है. आपने नोटिस किया होगा कि तनावग्रस्‍त या चिंतित होने पर अक्‍सर आपका पाचन तंत्र गड़बड़ा जाता है. शांत जगह पर सिर्फ 5 मिनट आंखें बंद करके सांस लेने पर आप अपनी आंतों में काफी सुधार कर सकते हैं.
नियमित रूप से खाओ, लेकिन लगातार नहीं
हर समय खाते रहने की आदत आंतों के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अच्‍छी नहीं होती है. क्‍योंकि आंतों को साफ, बैक्‍टीरिया और अपशिष्ट मुक्त करने के लिए, पाचन को आराम देने की जरूरत होती है. हर दो घंटे के बाद कुछ मिनट के लिए आपकी आंतें, मौजूद चिकनी मसल्‍स पाचन तंत्र के माध्‍यम से बैक्‍टीरिया और अपशिष्‍ट को बाहर निकालती है. लेकिन खाते समय यह प्रक्रिया रूक जाती है. इसलिए आंतों को स्‍वस्‍थ रखने के लिए दो भोजन के बीच थोड़ा सा अंतराल होना जरूरी होता है.

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